पर्यावरण दिवस आज: चंडीगढ़ की कहानी पर्यावरण सेवक प्रभुनाथ शाही की जुबानी

The Story of Chandigarh—In the Words of Environmental

The Story of Chandigarh—In the Words of Environmental

चंडीगढ़, 5 जून: Environment Day Today, देश के हरियालीयुक्त सुंदर शहर चंडीगढ़ में प्रतिवर्ष पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को व्यापक स्तर पर स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण एवं विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते है और शहर की कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ है, जैसे- उच्च वन और ग्रीन कवर, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी तथा पर्यावरण विभाग की जागरूकता के क्षेत्र में सक्रियता।
लेकिन साथ ही बढ़ते कचरे की समस्या, जल प्रदूषण और सीवेज जैसी गंभीर समस्याएँ, पुराने पेड़ों की रखरखाव की समस्या, सर्दियों में वायु प्रदूषण की समस्या उत्पन्न हो गई है, जिन्हें हल करने के लिए सतत विकास योजनाएँ लागू की जा रही हैं।
चंडीगढ़ अपने हरियाली के लिए एक प्रसिद्ध शहर है और प्रतिवर्ष वन विभाग द्वारा बागवानी विभाग एवं अन्य संस्थाओं के सहयोग से लाखों पौधे लगाए लगाए जाते है लेकिन चंडीगढ़ के पुराने पेड़ों की मुख्य समस्याएँ जैसे अनियमित रख रखाव, दीमक का प्रकोप और पुराने पेड़ों का लगातार कमजोर होना तथा साइंटिफिक प्रूनिंग का अभाव दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इससे कई पुराने पेड़ आंधी तूफ़ान में उखड़ने लगे है जिससे आम जन के लिए जान माल का खतरा बन गया है। कई पेड़ो से वर्षों बाद भी ट्री गार्ड नहीं निकाला गया है जो पेड़ो के विकास में बाधित है तथा जनता के पैसे का दुरुपयोग है।


चंडीगढ़ में कुछ अवांछनीय पौधे जैसे लेसुनिया, जंगली शहतूत और लैंटाना स्थानीय उपयोगी प्रजातियों के लिए खतरा बन रहे है।

पुराने पेड़ों को प्रभावित करने वाले मुख्य कारण हैं-

 

  • 1 दीमक का संक्रमण,

  • 2 पेड़ों के आसपास कंक्रीट का जाल,

  • 3 पेड़ों के उम्र बढ़ने के साथ खोखला होना,

  • 4 पेड़ों की छटाई में वैज्ञानिकता का अभाव।


जबकि इन समस्याओं के समाधान के लिए चंडीगढ़ प्रशासन के वन विभाग, बागवानी विभाग या नगर निगम के बागवानी विभाग को समयानुसार सूचित कर समाधान निकाला जा सकता है।
चंडीगढ़ के अन्य प्रमुख समस्याओं में डाडूमाजरा का कचरा डंपिंग यार्ड, अधिकतम वाहनों के कारण बढ़ता वायु प्रदूषण, गिरता भू जल स्तर और सुखना चो, एन चो तथा पटियाला की राव में सीवेज वाटर का मिलना शामिल है, हालाकि इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे है।
कचरा प्रबंधन के माध्यम से शहर में कचरा के पृथक्करण तथा कचरे के निस्तारण के लिए नगर निगम द्वारा कचरा प्रसंस्करण संयंत्र लगाया गया है और डाडूमाजरा के कचरे के पहाड़ को साफ़ करने पर भी प्रोजेक्ट चल रहा है।
जल प्रदूषण और भू जल संरक्षण के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगायें जा रहे है और शहर में रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम पर भी काम हो रहा है।
वायु प्रदूषण नियंत्रण एवं ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में सोलर रूफ टॉप के लिए क्रेस्ट द्वारा सब्सिडी भी दिया जा रहा हैं और इलेक्ट्रिक वाहनो के बढ़ावा को देखते हुए अधिक से अधिक जगहों पर चार्जिंग पॉइंट लगाया जा रहा है।
चंडीगढ़ में सिगल यूज प्लास्टिक को लेकर मुख्य समस्या अवैध भंडारण, सब्जी मंडियों में भारी कचरा और सख्त नियमों के बावजूद आम जनता द्वारा कपड़ा के थैलों का इस्तेमाल न करना और जागरूकता की कमी है।
हालाकि शहर को पूरी तरह पॉलीथिन मुक्त चंडीगढ़ बनाने के लिए प्रशासन निरंतर विशेष टास्क फोर्स के माध्यम से औचक निरीक्षण कर रहा है।
इस समस्या से निजात पाने के लिए प्रतिबंध और जुर्माना के अलावा अन्य विकल्प जैसे कपड़े या जूट के बैग का उपयोग अनिवार्य किया जाए।
चंडीगढ़ की जलवायु पर इन सभी उपर्युक्त कारणों की वजह से जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट असर पर रहा है, शहर में औसतन तापमान बढ़ रहा है, गर्मियां लंबी हो रही है और सर्दियां छोटी हो रही हैं। इसके अलावा बेमौसम बारिश और अनियंत्रित वायु प्रदूषण की समस्याएँ भी लगातार बढ़ रही हैं।
हालाकि चंडीगढ़ प्रशासन स्टेट ऐक्शन प्लान और क्लाइमेट चेंज के तहत कार्बन उत्सर्जन को कम करने और 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों को पूरी तरह अपनाने की दिशा में प्रयास कर रहा है, लेकिन इसकी सफलता तभी संभव जब इसमें अधिकतम जन भागीदारी हो और योजनाओं को भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाए।
चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से डेड एंड ड्राई ट्री के निपटान के लिए एक कमेटी है लेकिन इसके बावजूद बहुत सारे सार्वजनिक स्थलों पर सूखे पुराने पेड़ है जो आंधी तूफान में गिरकर जान माल का भारी नुकसान करते हैं। पहले भी चंडीगढ़ में कई दुर्घटनायें हो चुकी है। अतः संबंधित विभाग को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।